Nov 29, 2009

तेरी याद!

याद तुम इतना आया करो,
की मैं ख़ुद को भूल जाया करू |

तुम्हारी याद इस कदर आती हैं,
जैसे तूफ़ान आकर अपने साथ सब ले जाती हैं |

तुम्हे चाहे हम इस तरह,
बता सके किस तरह |

तुम हो तो सब कुछ हैं,
नही तो सिर्फ़ फुरकत हैं |

आजाओ तुम जल्दी से,
की रहा जाय जिन्दा मर्जी से |

खिला चेहरा तुम्हारा सामने आता हैं हर वक्त,
जैसे तुम्हारी याद आती हैं बेवक्त |

कही मार दे मुझे तेरी याद,
क्या तुम्हे भी आती हैं कभी मेरी याद ?

हर बार सोचा की तुम्हे याद करेंगे अब के बाद,
पर दिल ने इसको टाला बार बार |

क्या करे ये समझ आए,
तेरी याद मुझे छोड़ पाये |

- पूर्णिमा, २००३






5 comments:

Dayanand said...

good...... with this perfection in hindi too ...

Meethi Imli said...

is it perfect..? but thanks for your comments..:)

monty said...

Its very hard to understand the poem :). This type of poem that too from Poornima!!

Nicely written.. Keep it up

Meethi Imli said...

@Monty.. :P thanks so much! are you writing something these days?

Meethi Imli said...

@Monty.. Mahantesh.. where is it taking me from your profile.. have you also started blogging?